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आज हरी सिंह "नलवा" (24 April 1891 - 30 April 1834) का शहीदी दिवस है!

आज हरी सिंह "नलवा" (24 April 1891 - 30 April 1834) का शहीदी दिवस है! "रंग हरा हरी सिंह नलवे से" - "मेरे...

आज हरी सिंह "नलवा" (24 April 1891 - 30 April 1834) का शहीदी दिवस है!

आज हरी सिंह "नलवा" (24 April 1891 - 30 April 1834) का शहीदी दिवस है

"रंग हरा हरी सिंह नलवे से" - "मेरे देश की धरती सोना उगले -उगले हीरे मोती" - इस कालजयी गीत में जिस ये विशेषण जिस योद्धा के लिए इस्तेमाल किया गया है उन हरी सिंह का नाम हमें सिख इतिहास से आगे नही पढ़ाया गया, लेकिन नाम की महत्ता इतनी कि कहा जाता है कि अमेरिका-अफगानिस्तान युद्ध जब अपने चरम पर था, तब अमेरिकी जनरल अपने सैनिकों में जोश भरने के लिए हरी सिंह नलवा के किस्से सुनाते थे|
हरी सिंह "नलवा", पंजाब में कश्मीर का विलय करने वाले प्रथम योद्धा थे|
महाराजा रणजीत सिंह के प्रधान सेनापति हरि सिंह नलवा कश्मीर और पेशावर के गवर्नर बनाये गये थे कश्मीर में उन्होने एक नया सिक्का ढाला जो ‘हरि सिन्गी’ के नाम से जाना गया। यह सिक्का आज भी संग्रहालयों में प्रदर्शित है।

आज हरी सिंह "नलवा" (24 April 1891 - 30 April 1834) का शहीदी दिवस है

सा बच्चे हरिया रागले’ - अर्थात सो जा बच्चे नहीं तो हरी सिंह नलवा आ जाएगा - ये उनके अदम्य युद्ध कौशल और वीरता की पहचान है| पाकिस्तान के नार्थ ईस्ट फ्रंटियर के कबीलाई (ग्रामीण) इलाकों में आज भी जब कोई बच्चा रोता है तो मां उसे चुप कराने के लिए कहती है-‘सा बच्चे हरिया रागले’

हरि सिंह नलवा महाराजा रणजीत सिंह के विजय अभियान तथा सीमा विस्तार के प्रमुख नायकों में से एक थे। अहमदशाह अब्दाली के पश्चात् तैमूर लंग के काल में अफ़ग़ानिस्तान विस्तृत तथा अखंडित था। इसमें कश्मीर, लाहौर, पेशावर, कंधार तथा मुल्तान भी थे। हेरात, कलात, बलूचिस्तान, फारस आदि पर उसका प्रभुत्व था। हरि सिंह नलवा ने इनमें से अनेक प्रदेशों को महाराजा रणजीत सिंह की विजय अभियान में शामिल कर दिया। उन्होंने 1813 ई. में अटक, 1818 ई. में मुल्तान, 1819 ई.में कश्मीर तथा 1823 ई. में पेशावर की जीत में विशेष योगदान दिया। अत: 1824 ई. तक कश्मीर, मुल्तान और पेशावर पर महाराजा रणजीत सिंह का आधिपत्य हो गया।

आज उन्ही सरदार हरी सिंह "नलवा" का शहीदी दिवस है
भारत के वीर सपूत को सादर नमन !!

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