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बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का 53 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में निधन.Actor Irrfan Khan passes away after prolonged illness

बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का 53 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में निधन राजस्थान के जयपुर में टोंक के रहने वाले जागीरदार खान की बेग़...

बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का 53 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में निधन

 बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का 53 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में निधन.Actor Irrfan Khan passes away after prolonged illness

राजस्थान के जयपुर में टोंक के रहने वाले जागीरदार खान की बेग़म सईदा ने 7 जनवरी 1967 को इरफ़ान को जन्म दिया था।
इरफ़ान का मन कभी पढ़ने में नहीं लगा उतना, जितना अच्छा वह क्रिकेट खेलते थे। यहां तक कि उनका चयन सीके नायडू ट्रॉफी के लिए भी हो गया था, पर टायर व्यवसायी पिता ने पुत्र को क्रिकेट खेलने नहीं दिया।
बचपन में पिता शिकार पर ले जाते थे जयपुर के पास तब बसे घने जंगलों में, पर यह इरफ़ान को कभी अच्छा नहीं लगा। उनका मानना था कि बेजुबान जानवरों को मारना उचित नहीं।
किशोरावस्था में जयपुर से जब दिल्ली पहुंचे तो वहां मुलाकात हुयी इरफ़ान की नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से जुड़े किसी शख्स से। यहाँ से वह जुड़े नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से।
 बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का 53 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में निधन.Actor Irrfan Khan passes away after prolonged illness

नामांकन हेतु जब यहाँ पहुंचे तो उन्होंने झूठ बोला कि उन्हें थिएटर में काम करने का अनुभव है। पर आश्चर्य कि उनका झूठ तो यहाँ काम आया ही, उनके हिडन टैलेंट ने भी पहली बार में ही 1984 में उनका दाखिला नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में करा दिया, जहाँ दाखिला लेने के लिए मनोज बाजपेयी जैसे मंझे हुए अदाकार को भी तीन साल संघर्ष करना पड़ा था!
यहीं इरफ़ान की मुलाकात सुतापा सिकदर से हुयी, जो खुद भी प्रतिभासंपन्न थीं। सुतापा को इंप्रेस करने के चक्कर में एक बार इरफान उनकी टूटी हुयी चप्पल को मोची से ठीक करवाने के लिए आधे किलोमीटर तक इधर-उधर दौड़ते रहे थे।
भले ही उन्होंने अपनी फिल्म 'ये साली ज़िन्दगी' में बहुत बाद में कहा था कि 'लोग सुनेंगे तो क्या कहेंगे, चू@# आशिक़ी के चक्कर में मर गया, और लौंडिया भी नहीं मिली'..पर उससे बहुत पहले ही उन्होंने अपने सच्ची आशिक़ी को मुक़ाम तक पहुंचाया था, जब 23 फरवरी 1995 को वह सुतापा के साथ परिणय सूत्र में बंधे।
 बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का 53 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में निधन.Actor Irrfan Khan passes away after prolonged illness

एक समय था जब लोग समझते थे कि हीरो बनने के लिए चॉकलेटी होना बेहद जरूरी है, पर इरफ़ान जैसे मंझे हुए अदाकार ने इस भ्रम को बखूबी तोड़ा।
फिल्मों में उनके चेहरे की भाव-भंगिमा, उनकी बोलती आँखें, उनकी भीतर तक बेध देने वाली जादुई गम्भीर आवाज़, बेहद सहजता के साथ धीमे से अपनी नायिका से प्रेम की अभिव्यक्ति कर जाना, तो उसी सहजता व धीमी परन्तु गम्भीर आवाज़ में किसी को भी धमका देने वाली उनकी खलनायकी किसी का भी दिल जीतने की क्षमता रखती थी!
जब फ़िल्म जज़्बा में उनको बोलते सुना कि 'शराफत की दुनिया का किस्सा ही खतम, अब जैसी दुनिया वैसे हम', या फिर फ़िल्म हासिल में उनका डायलॉग कि 'और जान से मार देना बेटा, हम रह गए ना, मारने में देर नहीं लगाएंगे भगवान कसम', तो लगा जैसे यार प्रियांक, यह तो तेरे दिल की बात को रख दिया इरफ़ान भाई ने।
 बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का 53 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में निधन.Actor Irrfan Khan passes away after prolonged illness

फ़िल्म हैदर में उनका बोलना कि 'आप जिस्म हैं तो मैं रूह, आप फानी में लफानी' कि सच में वह मनोमस्तिष्क से होते हुए जैसे रूह में उतर जाते हों।
साहब, बीवी और गैंगस्टर में उन्होंने कहा था कि हमारी तो गाली पर भी ताली पड़ती है, तो गलत नहीं कहा था। उनकी हर अदाकारी पर तालियां पड़ती थीं सिनेमा हॉल में।
शुरुआत में उनका संघर्ष इतना लंबा खींचा कि एक बार तो वह फ़िल्म इंडस्ट्री से हटने का सोचने लगे। पर फिर वह क्या है न कि कोई नहीं जानता नियति कब क्या कर दे। टीवी पर शुरुआत में छोटी-छोटी भूमिकाओं में भी वह अपनी छाप छोड़ने लगे 1994 से 1998 के मध्य।
फिर धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और एक साधारण रंग-रूप वाला, परन्तु असाधारण टैलेंट वाला अदाकार अपनी अदाकारी के जलवे बड़े रुपहले पर्दे पर भी बिखेरने लगा। इस प्रकार अभिनय की दुनिया को मिला एक नया सितारा। मेरे जैसा उनका चहेता तो सिर्फ यह देख कर कि किसी मूवी में इरफ़ान भाई हैं, तो वह मूवी देख आता था!
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'द किलर' में उन्होंने सच ही कहा था कि बड़े शहरों की हवा और छोटे शहरों का पानी, बड़ा खतरनाक होता है। या फिर 'लाइफ इन मेट्रो' में भी कहाँ गलत बोला था उन्होंने कि ये शहर हमें जितना देता है, उससे कहीं ज्यादा ले लेता है!
फ़िल्म चॉकलेट में उनका कहना कि 'शैतान की सबसे बड़ी चाल ये है कि वो सामने नहीं आता' तो लगा जैसे यह शैतान वह रेयर कैंसर (न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर) ही था जो चुपके से उनके पीछे आ गया और हम सबके पसंदीदा कलाकार को लेकर चला गया हमेशा के लिए!
फ़िल्म पीकू में उन्होंने ठीक ही कहा था कि डेथ और शीट, किसी को, कहीं भी, कभी भी, आ सकती है.. और वही हुआ भी!..
..महज 53 वर्ष की न जाने वाली अवस्था में एकाएक उनकी डेथ आ गयी, और वह भी उनकी माँ के जाने के महज चार दिनों में। दुर्भाग्य ऐसा कि लॉक डाउन के कारण वह मुम्बई से जयपुर अपनी माँ के जनाजे में भी शामिल न हो सके थे। गोया वह अपनी माँ के पीछे-पीछे जाने के लिए ही रुके थे।
फ़िल्म जुरासिक में वह जीवन का सार ही कह गए कि 'The key to a happy life is to expect you are never actually in control..!'
फ़िल्म मदारी में उन्होंने कहा था कि 'तुम मेरी दुनिया छीनोगे, मैं तुम्हारी दुनिया में घुस जाऊंगा'..सच तो कहा था इरफ़ान भाई ने तब। लगता है वह हम सबकी दुनिया में सब कुछ उनका छीन जाने के बाद भी घुस गए हों!
इरफ़ान भाई अपनी फ़िल्म 'हिंदी मीडियम' में एक तल्ख़ सच्चाई बोल गए थे कि 'एक फ्रांस बन्दा, एक जर्मन बन्दा स्पीक रॉन्ग इंग्लिश, वी नो प्रॉब्लम, एक इंडियन बन्दा से रॉन्ग इंग्लिश, बन्दा ही बेकार हो जाता है जी!'
और जाते-जाते भी मक़बूल मियां हम सभी को 'इंग्लिश मीडियम' दे गए!
आज हम सभी भारतीय जाति-धर्म से ऊपर उठ कर इरफ़ान भाई के जाने से दुःखी हैं। यही वास्तविक भारत की सच्ची तस्वीर है। यह अपने आप में बताने को काफी है कि इरफ़ान खान कितनी दमदार शख्सियत थे।
 बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का 53 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में निधन.Actor Irrfan Khan passes away after prolonged illness

आप जहाँ भी रहे इरफ़ान भाई, हमेशा सुकून में रहिएगा अपनी स्वर्गीया माँ की ममता की छांव में, खुश रहिएगा। यही दुआ है ईश्वर से!

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